लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ ट्रंप-मोदी की साझा रणनीति
आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प
- भारत और अमेरिका ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा मानते हुए मिलकर कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
- लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) पर विशेष ध्यान दिया गया।
पाकिस्तान पर दबाव
- पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों के ठिकानों पर रोक लगाने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाया गया।
- अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक और सैन्य सहायता में कटौती की।
खुफिया जानकारी साझा करना
- दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सूचना साझा करने की प्रणाली को मजबूत किया गया।
संयुक्त सैन्य सहयोग
- आतंकवाद विरोधी सैन्य अभ्यास और ऑपरेशनों में सहयोग बढ़ाया गया।
- आधुनिक हथियारों और तकनीक के उपयोग पर संयुक्त कार्य योजना तैयार की गई।
आर्थिक स्रोतों पर रोक
- आतंकी संगठनों की फंडिंग और वित्तीय मदद को खत्म करने के लिए वैश्विक मंचों पर मिलकर प्रयास किए गए।
- अमेरिका और भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट कराने की पहल की।
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रणनीति
- जी-7, जी-20, और UN में आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए साझेदारी बनाई गई।
- अन्य देशों को भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया गया।
साइबर आतंकवाद पर कार्रवाई
- डिजिटल माध्यम से आतंकियों की भर्ती और फंडिंग रोकने के लिए साइबर सुरक्षा को मजबूत किया गया।
- इंटरनेट पर आतंकी प्रचार सामग्री को हटाने के लिए कड़े कदम उठाए गए।
निष्कर्ष
ट्रंप-मोदी की इस साझा रणनीति का उद्देश्य आतंकवाद को जड़ से खत्म करना और अंतर्राष्ट्रीय शांति को बनाए रखना है। यह साझेदारी भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने में मददगार साबित हुई।
